क्रिया – परिभाषा, भेद, और उदाहरण – Kriya Ki Paribhasha, Bhed, Udaharan पूर्ण जानकारी

Hindi Grammar के इस भाग मे आप जानेंगे Kriya Ki Paribhasha, Kriya Ke Bhed, Kriya Kise Kahate Hain तथा Kriya Ke Bhed Kitne Hote Hain. आप मे से कई लोग हिंदी मे इस पाठ मे confuse रहते है। तो इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको Kriya In hindi मे कोई समस्य नहीं होगी।

इसको पढ़ने के बाद आप Kriya Hindi worksheets for class 9, 10, 11, 12, 8 आदि कक्षाओं के साथ-साथ UPTET, UP PET, UPSSSC Lekhpal जैसे सभी परीक्षाओं मे काफी मदद करेगा। तो इसको पूरा जरूर पढ़ें।

kriya in hindi

Table of Contents

Kriya Ki Paribhasha

क्रिया की परीभाषा – जिन शब्दों से किसी कार्य का होना या फिर करना पाया जाए या समझा जाता है, उसे ही क्रिया कहते है। इसे अंग्रेजी मे Verb कहते है। जैसे – कूदना, रोना, पीना, पढ़ना, दौड़ना, हँसना इत्यादि।

यहाँ यह भी याद रहे की हिंदी मे क्रिया का रूप पुरुष, लिंग व वचन के अनुसार बदलते है। जिससे क्रिया को समझने मे आसानी होती है। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते है तथा धातु शब्द के आगे ना को जोड़ने से वह क्रिया शब्द बन जाता है। जैसे –

  • लिख + ना = लिखना
  • पढ़ +ना = पढ़ना

हिंदी मे धातु के कुल दो रूप होते है –

  • मूल धातु – इसे स्वतंत्र धातु भी कहते है, क्योंकि यह अन्य किसी शब्द पर निर्भर नहीं होती है। जैसे – पी, लिख, पढ़, चल इत्यादि
  • यौगिक धातु – इसे संयुक्त धातु भी कहते हैं, क्योंकि यह एक या दो धातु शब्दों से मिलकर बना होता है।

Kriya Ke Bhed

KRIYA KE BHED
क्रिया के भेद

Prayog Ke Adhar Par Kriya Ke Bhed (क्रिया के भेद)

प्रयोग के आधार पर क्रिया के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं-

  1. सकर्मक क्रिया
  2. अकर्मक क्रिया

सकर्मक क्रिया की परीभाषा (Sakarmak Kriya In Hindi)

जिन क्रियाओं के कार्य का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर ही पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहतै है। अंग्रेजी में इसे transitive verb कहा जाता है। जैसे –

  • सीता खाना पकाती है।
  • रवि लिखता है।
  • श्याम लकड़ी काटता है
  • अध्यापक ने लड़के को पकड़ा
    • यहाँ, अध्यापक द्वारा पकड़ने का कार्य सीधे लड़के पर पड़ रहा है, अतः यह वाक्य सकर्मक क्रिया कहलाएगी। सकर्मक क्रिया दो प्रकार की होती है।

एककर्मक सकर्मक क्रिया – ऐसी क्रियाएँ जिनका एक ही कर्म होता है, एककर्मक सकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे –

  • राम आम खाता है।
  • सीता दूध पीती है।

द्विकर्मक सकर्मक क्रिया – जिन क्रिया के साथ दो कर्म लगे हो या फिर दो कर्मों के पूर्ण होने का पता चलता है उसे द्विकर्मक क्रिया कहते है। यहाँ यह ध्यान रहे की, इसमें हमेशा पहला कर्म प्राणीवाचक तथा दूसरा कर्म निर्जीव होता है। जैसे –

  • श्याम अपने भाई के साथ टीवी देख रहा है। (दो कर्म – भाई, टीवी)
  • राहुल ने गौरव को काफी पिलाई। (दो कर्म – गौरव, काफी)
  • महेश ने गुरुजी के पैर छुए। (दो कर्म – गुरुजी, पैर)

अकर्मक क्रिया की परीभाषा (Akarmak Kriya)

जिस क्रिया के कार्य का फल कर्ता पर ही रहता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते है। अंग्रेजी में इसे intransitive verb कहा जाता है। जैसे-

  • विद्यार्थी पढ़ते है।
  • चिड़िया उड़ती है।
  • मछली तैरती है।
  • राम दौड़ेगा।

व्युत्पत्ति व रचना के आधार पर क्रिया के भेद (Kriya Ke Bhed)

व्युत्पत्ति व रचना के आधार पर क्रिया के दो भेद होते है-

  • मूल क्रिया (रूढ़ क्रिया)
  • यौगिक क्रिया

मूल क्रिया किसे कहते हैं (Mool Kriya)

जो क्रिया मूल धान से ही बनती है, उसे मूल क्रिया या रूढ़ क्रिया कहते है। जैसे – पढ़ना, रोना, हँसना, लिखना आदि, ये सभी क्रियाएँ पढ़, रो, हँस, लिख के मूल धातु से बनी है।

यौगिक क्रिया किसे कहते हैं (Yogik Kriya)

यौगिक का अर्थ होता है- एक से अधिक का मेल, यानी मूल क्रिया में प्रत्यय लगाकर , कई क्रियाओं को संयुक्त करके अथवा संज्ञा और विशेषण में प्रत्यय लगाकर बनाई जाती है। जैसे – हँसाना, बताना, रलाना इत्यादि। हिंदी भाषा मे यौगिक क्रिया के पाँच भेद होते है-

  1. नामधातु क्रिया
  2. प्रेरणार्थक क्रिया
  3. पूर्णकालिक क्रिया
  4. संयुक्त क्रिया
  5. अनुकरणात्मक क्रिया

नामधातु क्रिया किसे कहते है? (Naamdhatu Kriya)

ऐसा धातु शब्द जिसका निर्माण संज्ञा, विशेषण अथवा सर्वनाम से होता है, उसे नामधातु क्रिया कहते है। जैसे –

  • बात से बतियाना
  • दुःख से दुःखाना
  • हाथ से हथियाना
  • गर्म से गरमाना
  • चिकना से चिकनाना

संज्ञा नामधातु

संज्ञानामधातुनामधातु क्रिया
झूठझूठझूठलाना
लोभलुभालुभाना
माटीमाटियामटियाना
शर्मशर्माशर्माना

विशेषण नामधातु

संज्ञानामधातुनामधातु क्रिया
फिल्मफिल्मीफिल्माना
लज्जालजालजाना
लालचलालच ललचाना
चिकनाचिकना चिकनाना

प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते है? (Preranthak Kriya)

जिन क्रियाओं के द्वारा यह बोध होता है कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे के द्वारा या दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है तो उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते है। जैसे –

  • रमेश राधा से खाना पकवाता है।

इस वाक्य मे कर्ता रमेश तथा दूसरा कर्ता राधा है, इस उदाहरण में राधा खाना पका यानी बना तो रही है, लेकिन उसे कार्य करने की प्रेरणा रमेश के द्वारा मिल रही है। इस तरह जो कर्ता दूसरे कर्ता को प्रेरित करता है, उसे प्रेरक कर्ता एवं जिसको वह प्रेरित करता है, उसे प्रेरित कर्ता कहते है।

प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के प्रमुख नियम-

  • मूल द्वि-अक्षरी धातुओं में आना तथा वाना जोड़ने से प्रेरणार्थक क्रियाएँ बनती है। जैसे –
    • बढ़- बढ़ाना – बढ़वाना
    • चल – चलाना – चलवाना
    • बात – बाताना – बतवाना
  • द्वि-अक्षरी धातु शब्द मे ऐ व ओ को छोड़कर दीर्घ स्वर ह्रस्व स्वर हो जाता है। जैसे –
    • लौट – लौटाना – लौटवाना
    • जीत – जीताना – जीतवाना
  • तीन अक्षर वाली धातुओं में आना या वाना जोड़कर प्रेरणार्थक क्रियाएं बनाई जाती है।
    • बदल – बदलाना, बदलवाना
    • समझ – समझाना, समझवाना

पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते है? (Purvkalik Kriya)

इसकी मुख्य पहचान यह होती है कि इसमें दो क्रियाएं होती है, जिसमे एक क्रिया पूर्व मे होती है तथा दूसरी क्रिया अन्त में होती है। जो क्रिया पूर्व मे होती है, उसे समायिका क्रिया कहते है। पूर्वकालिक क्रिया की मुख्य पहचान है कि इसमें क्रिये मे करके, कर, ही, ती, ते इत्यादि शब्द आते है। जैसे –

  • गीता चारपाई पर जाते ही सो गई।
  • राजीव के दादीजी खाना खाकर धूमने गई।

संयुक्त क्रिया किसे कहते है? (Sanyukt Kriya)

दो या दो से अघिक क्रियाओं के योग से जो पूर्व क्रिया बनती है, उसे ही संयुक्त क्रिया कहा जाता है। इसका प्रयोग अनिष्टता, अनुमति, आरम्भ, अवकाश, इच्छा, निरन्तर, समाप्ति, आवश्यकता, अभ्यास आदि अर्थों मे भी प्रयुक्त होता है। जैसे –

  • राजन खाना खा चुका।

इस वाक्य में खाना तथा चुका दो क्रिया के योग से पूर्ण क्रिया बनी है। अतः यह संयुक्त क्रिया है।

अनुकरणात्मक क्रिया किसे कहते है? (Anukarnatmak Kriya)

किसी वास्तविक या कल्पित ध्वनि के अनुकरण के द्वारा से बनने वाली क्रिया को अनुकरणात्मक क्रिया कहते है। जैसे – खटखट से खटखटना, थपथप से थपथपाना, भनभन से भनभनाना आदि।

अर्थ की दृष्टि से क्रिया के भेद

अर्थ के अनुसार क्रिया के कई भेद है जिनमे यहाँ पर निम्न को क्रमवार बताया गया है-

  1. आरम्भबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया से हमें पता चले की क्रिया आरम्भ होने वाली है, उसे आरम्भबोधक क्रिया कहते है। जैसे –
    • रामू के घर से निकलते ही बरसात होने लगी।
    • यह नाचने लगा।
    • सीता खेलने लगी।
  2. अवकाशबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया वाक्य में किसी क्रया को निष्पन्न करने के लिए अवकाश का बोध कराया जाए, उसे अवकाशबोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे –
    • राम बड़ी मुश्किल से सो पाया था।
  3. समाप्तिबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया से मुख्य क्रिया के समापन का पता चले, उसे समाप्तिबोधक संयुक्त क्रिया कहते है। जैसे –
    • वे सो चुके है।
    • राम ने पुस्तक पढ़ ली है।
    • रामू खा चुका है।
  4. इच्छाबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया से क्रियाओं के करने की इच्छा का पता चलता है, उसे इच्छाबोधक संयुक्त क्रिया कहते है। जैसे –
    • मै घर आना चाहता हूँ।
  5. अनुमतिबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया से किसी क्रिया को अनुमति दिए जाने का पता चलता है तो उसे अनुमतिबोधक संयुक्त क्रिया कहते है। जैसे –
    • मुझे सोने दो।
    • मुझे कहने दो।
  6. नित्यताबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया से किसी क्रिया के नित्यता का बोध हो या फिर समाप्त न होने का बोध हो तो उसे नित्यताबोधक संयुक्त क्रिया कहते है। जैसे –
    • नदी बह रही है।
    • पेड़ बढ़ता गया।
  7. शक्तिबोधक संयुक्ति क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया से किसी क्रिया के शक्ति दिखाने या फित उसका पता चलता है, उसे शक्तिबोधक क्रिया कहते है। जैसे –
    • मैं लिख सकता हूँ।
    • मैं पढ़ सकता हूँ।
  8. अभ्यासबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रिया में क्रिया से किसी क्रिया के अभ्यास का पता चले, उसे अभ्यासबोधक संयुक्त क्रिया कहते है। जैसे –
    • तुम हमेशा पढ़ा करते हो।
    • सीता रात्रि में हमेशा डायरी लिखा करती हैं।
  9. पुनरूक्त संयुक्त क्रिया – जब दो समान ध्वनि वाली क्रिया के जुड़ने का पता चलता है उसे ही पुनरुक्त संयुक्त क्रिया कहते है। जैसे –
    • वह खेला-कूदा करता है।
  10. निश्चयबोधक संयुक्त क्रिया – जिन संयुक्त क्रियाओं से मुख्य क्रिया के व्यवहार के निश्चित्ता का पता चलता है उसे निश्चयबोधक संयुक्त क्रिया कहलाता है। जैसे –
    • यह बीच में ही बोल उठा- मै मार दूँगा।

Kriya Ke Bhed Kitne Hote Hain

प्रयोग के आधार पर क्रिया के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं-

1- सकर्मक क्रिया
2- अकर्मक क्रिया

व्युत्पत्ति व रचना के आधार पर क्रिया के दो भेद होते है-

1- मूल क्रिया (रूढ़ क्रिया)
2- यौगिक क्रिया

अर्थ के अनुसार क्रिया के कई भेद है जिनमे यहाँ पर निम्न को क्रमवार बताया गया है-

1- आरम्भबोधक संयुक्त क्रिया
2- अवकाशबोधक संयुक्त क्रिया
3- समाप्तिबोधक संयुक्त क्रिया
4- इच्छाबोधक संयुक्त क्रिया
5- अनुमतिबोधक संयुक्त क्रिया
6- नित्यताबोधक संयुक्त क्रिया
7- शक्तिबोधक संयुक्ति क्रिया
8- अभ्यासबोधक संयुक्त क्रिया
9- पुनरूक्त संयुक्त क्रिया
10- निश्चयबोधक संयुक्त क्रिया

इसे भी जानें –

Kriya In Hindi PDF Download

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क्रिया प्रश्न-उत्तर

क्रिया किसे कहते है और उसके भेद?

जिन शब्दों से किसी कार्य का होना या फिर करना पाया जाए या समझा जाता है, उसे ही क्रिया कहते है। व्युत्पत्ति व रचना के आधार पर क्रिया के दो भेद होते है-
1. मूल क्रिया (रूढ़ क्रिया)
2. यौगिक क्रिया

यौगिक क्रिया कितने प्रकार की होती है?

यौगिक क्रिया के पाँच भेद होते है- नामधातु क्रिया, प्रेरणार्थक क्रिया, पूर्णकालिक क्रिया, संयुक्त क्रिया तथा अनुकरणात्मक क्रिया

रचना के आधार पर क्रिया के भेद?

प्रयोग के आधार पर क्रिया के मुख्य रूप से दो भेद होते हैं- सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया

Kriya Kise Kahate Hain?

जिस शब्द से किसी काम का करना या होना प्रकट होता हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- पढ़ना, लिखना, खाना, आना इत्यादि।

क्रिया का मूल रूप क्या है?

क्रिया का मूल रूप धातु होता है, इसी मे प्रत्यय लगकर क्रिया का रूप लेते है।

तो इस पोस्ट मे आपने Kriya In Hindi, Kriya Ki Paribhasha, Kriya Ke Bhed Kriya Kise Kahate Hain, Kriya Ke Bhed Kitne Hote Hain आदि के बारे मे बताया है। तो अगर आपको इससे संबंधित कोई प्रश्न आपके मन मे हो तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते है, बाकी पोस्ट को शेयर करना न भूलें।

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